Tally Prime All Groups Explanation in Hindi

इस लेख Tally Prime All Groups Explanation मे आज Gateway of Tally के अंतर्गत आने वाले विभिन्न विकल्प तथा मुख्य रूप से ग्रुप्स (Group) के बारे मे चर्चा करेंगे। टैली के अंतर्गत ग्रुप (Group) बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक हैं, क्योंकि टैली मे जितने भी लेजर्स क्रीऐट किए जाते हैं, वे सभी किसी न किसी ग्रुप के नीचे ही रखे जाते हैं। अगर ग्रुप का ज्ञान सही से नहीं होगा तो लेजर के लिए सही ग्रुप का चुनाव भी नहीं कर सकते, और रिजल्ट मे बलेन्स शीट (Balance Sheet) गलत बनेगी। तो चलियें जानते हैं Gateway of Tally के अंतर्गत आने वाले विभिन्न विकल्पो मे से एक ग्रुप (Group) के बारे में, ग्रुप कितने प्रकार के होते हैं, सभी का अर्थ क्या होता है तथा इनकी उपयोगिता क्या है।

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Table of Contents

गेटवे ऑफ टैली क्या है | What is Gateway of Tally

Tally Prime All Groups Explanation

Gateway of Tally टैली की मुख्य होम विंडो होती है, यहीं से टैली के सम्पूर्ण फीचर्स को एक्सेस किया जाता है। Gateway of Tally मे Masters, Transactions, Utilities और Reports के अंतर्गत जो भी ऑप्शन आते हैं;वे निम्न प्रकार हैं।

मास्टर्स | Masters

Gateway of Tally में पहला सेक्शन Masters का होता है। मास्टर्स (Masters) के अंतर्गत Create, Alter और Chart of Accounts ऑप्शन आते है। इन विकल्पों का विवरण निम्न प्रकार है –

Create

मास्टर्स के अंदर पहला विकल्प Create का होता है। Create मेनू के अंदर आने वाले विकल्प निम्न प्रकार हैं –

  1. Accounting Masters – इसके अंतर्गत कंपनी के लेजर्स (Ledgers), ग्रुप्स (Groups), करंसी (Currency), बजट (Budget) आदि क्रीऐट कर सकते है।
  2. Inventory Masters – इसके अंतर्गत कंपनी की इनवेंटरी से संबंधित स्टॉक ग्रुप (Stock Group), स्टॉक केटेगरी (Stock Category), स्टॉक आइटम (Stock Item), यूनिट (Unit), गोडाउन (Godown) आदि क्रीऐट कर सकते हैं।
  3. Statutory Details – इसके अंतर्गत कंपनी के Tax से संबंधित डिटेल्स सेटअप और अपडेट कर सकते है। जसे – GST, PAN/CIN आदि।

Alter

मास्टर्स के अंदर दूसरा विकल्प Alter का होता है। इसके अंतर्गत बनाए गए Accounting व Inventory Masters या Statutory Details को अपडेट या डिलीट करने की सुविधा मिलती है।

Chart of Accounts

मास्टर्स के अंदर तीसरा विकल्प Alter का होता है। इसके अंतर्गत हम बनाए गए Accounting व Inventory Masters को चार्ट के रूप मे देख सकते हैं, जैसे किसी ग्रुप के अंतर्गत कितने लेजर क्रीऐट किए जा चुके हैं यह पता कर सकते हैं।

टैली मे ग्रुप क्या होते हैं | What are the Groups in Tally?

व्यापार मे अकाउंटिंग करने के लिए कई प्रकार के खाते बनाए जाते है जिनकी केटेगरी को निर्धारित करने के लिए Tally मे ग्रुप (Group) का इस्तेमाल किया जाता है। ग्रुप एक ही प्रकार के लेजर्स के समूह का एक नाम होता है। उदाहरण के लिए अप्रत्यक्ष खर्च (Indirect Expense) एक प्रकार का ग्रुप है, अब इससे संबंधित कई लेजर इस प्रकार हो सकते है जैसे – Salary A/c, Stationary A/c, Advertisement A/c, Tea Expense A/c आदि। इन सभी लेजर को बनाते समय Indirect Expense ग्रुप का चुनाव करेंगे। अगर किसी लेजर (खाता) को गलत ग्रुप में रखा जाता है, तो बलेन्स शीट पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसलिए लेजर बनाते समय सही ग्रुप का चुनाव किया जाना चाहिए। तो चलिए जानते हैं Tally Prime All Groups Explanation के अंतर्गत सभी ग्रुप्स के बारे मे।

टैली प्राइम के सभी ग्रुप की लिस्ट निम्न पाथ के अनुसार देख सकते हैं।

Path : Gateway of Tally>Alter>Group>Enter

Tally Prime All Groups Explanation
Tally Prime All Groups Explanation

टैली के सभी ग्रुप्स की व्याख्या | Tally Prime All Groups Explanation

1. Bank Accounts – इस ग्रुप में सभी सामान्य बैंक खातों से संबंधित लेजर क्रीऐट किए जाते हैं। जैसे – PNB Bank A/c, SBI Bank A/c आदि।

2. Bank OCC A/c – इस ग्रुप में OCC (Open Credit Cash) बैंक अकाउंट से संबंधित लेजर क्रीऐट किए जाते है।

3. Bank OD A/c – इस ग्रुप मे Bank Overdraft खातों से संबंधित लेजर क्रीऐट किए जाते हैं। बैंक ओवरड्राफ्ट किसी व्यवसाय के लिए एक बैंक अकाउंट होता है, जिसमे 0 बैलन्स होने पर भी एक लिमिट तक कैश निकाला जा सकता है।

4, Branch/Divisions – यदि किसी कंपनी की एक से ज्यादा ब्रांच है और उन सभी ब्रांच का हिसाब किताब एक ही जगह रखा जाता है, तो उन सभी Branch/Divisions से संबन्धित लेजर को इस Group के अंतर्गत क्रीऐट किया जाता है। जैसे – ABC Pvt. Ltd. Lucknow, ABC Pvt. Ltd. Kanpur, ABC Pvt. Ltd. Delhi आदि।

5. Capital Account – इस ग्रुप मे कैपिटल (पूंजी) से संबंधित लेजर क्रीऐट किए जाते है। जैसे – Capital A/c, Harish Capital A/c आदि।

6. Cash-in-Hand – इस ग्रुप मे कैश (Cash) से संबंधित लेजर को रखा जाता है, यदि कंपनी एक से अधिक Cash लेजर का इस्तेमाल करती है, जैसे – Cash A/c 2, Cash A/c 3 आदि।

7. Current Assets – इस ग्रुप मे ऐसी संपत्तियों के लेजर क्रीऐट किए जाते है, जो चल संपत्तियों (Current Assets) से संबंधित हों। जैसे – Advance Payment, Bills Receivable, Prepaid Rent, Stock आदि।

8. Current Liabilities – इस ग्रुप मे उधारियों से संबंधित लेजर्स क्रीऐट किए जाते है, जिनको भुगतान करना है। जैसे – Tax Payable, Bills Payable, Salary Payable, Loan Payable आदि।

9. Deposits (Asset) – व्यापार मे जब कोई संपत्ति लंबे समय के लिए डिपॉजिट की जाती है, तो ऐसी संपत्तियों से संबंधित लेजर्स इस ग्रुप के अंतर्गत क्रीऐट किए जाते हैं। जैसे – Godown Security Deposit, Telephone Security Deposit, Bond, Fixed Deposit आदि।

10. Direct Expenses – इस ग्रुप मे प्रत्यक्ष खर्चों से संबंधित लेजर्स क्रीऐट किए जाते है, जो माल की खरीद-फरोक्त तथा माल को निर्माण कराने पर खर्च किए जाते है। जैसे – Freight Inward, Carriage Inward, Coal & Fuel, Wages आदि।

11. Direct Incomes – इस ग्रुप मे प्रत्यक्ष आय से संबंधित लेजर्स क्रीऐट किए जाते हैं, ऐसी आय जो व्यापार के मुख्य सोर्स से प्राप्त होती है। जैसे- Income from Service Sales, Income form Goods Sales, Apprentice Premium आदि।

12. Duties & Taxes –  इस ग्रुप मे सभी प्रकार के कर (Tax) से संबंधित लेजर्स को क्रीऐट किए जाते है। जैसे – IGST, CGST, SGST, TDS, VAT आदि।

13. Fixed Assets – इस ग्रुप मे व्यवसाय की सभी स्थायी संपत्तियों के लेजर्स बनाए जाते है, वे संपत्तियां जो व्यवसाय के संचालन मे सहायक होती हैं। जैसे – Building, Land, Computer, Furniture, Machinery, Tools आदि।

14. Indirect Expenses – इस ग्रुप मे अप्रत्यक्ष खर्चों से संबंधित लेजर्स क्रीऐट किए जाते है, वे खर्चे जो माल की बिक्री तथा कार्यालय (Office) से संबंधित होते हैं। जैसे – Staff Salary, Building Rent, Audit Fee, Sundry Expense, Sweeping Charges, Advertisement, Stationary, Freight Outward आदि।

15. Indirect Incomes – इस ग्रुप मे अप्रत्यक्ष आय से संबंधित लेजर्स क्रीऐट किए जाते हैं, यानि ऐसी आय जिसका सीधा संबंध माल या सर्विस की बिक्री से नही होता है। जैसे – Interest Received, Discount Received, Scrap Sale, Commission Received आदि।

16. Investment – इस ग्रुप मे इनवेस्टमेंट से संबंधित लेजर्स बनाए जाते हैं। वे संपत्तियाँ जो लॉंग टर्म मे अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से खरीदी जाती हैं। जैसे- Shares, Properties, Mutual Fund, Stocks आदि।

17. Loan & Advances (Asset) – यदि व्यवसाय मे किसी को Advance Payment या Loan दिया गया है, तो इससे संबंधित लेजर्स इस ग्रुप के अंतर्गत क्रीऐट किए जाते है। जैसे – Loan Given to Friends or Relatives, Advance Payment to Employee or Party आदि।

18. Loans (Liability) – यदि व्यवसाय मे किसी से बैंक या पार्टी से ऋण (Loan) लिया है, तो उस पार्टी के लेजर को इस ग्रुप के अंतर्गत क्रीऐट करते है। जैसे – SBI Loan A/c, Advance Taken from Party आदि।

19. Misc. Expenses (Asset) – इस ग्रुप मे उन खर्चों के लेजर्स क्रीऐट करते है, जिनका पेमेंट वर्षों के अनुपात मे एक मुश्त करना होता है। जैसे – Preliminary Expenses, Copyright Payment आदि।

20. Provisions – इस ग्रुप मे उन लेजर्स को क्रीऐट करते हैं, जो भविष्य मे होने वाले किसी नुकसान की आपूर्ति करने के लिए बनाए जाते हैं। जैसे – Provision for Bad Debts, Loss Recovery आदि।

21. Purchase Accounts – इस ग्रुप मे माल की खरीददारी व खरीदा माल वापसी से संबंधित लेजर्स क्रीऐट किए जाते हैं। जैसे – Purchase A/c, Purchase Return A/c आदि।

22. Reserves & Surplus – व्यसाय को भविष्य मे बेहतर बनने के लिए जिन पूंजियों को रिजर्व करके रखा जाता है, उनसे संबंधित लेजर्स इस ग्रुप के अंतर्गत क्रीऐट किए जाते हैं। जैसे – Generator Reserves, Machine Reserves, Another Branch Reserves आदि।

23. Retained Earnings – इस ग्रुप मे ऐसे लेजर्स क्रीऐट किए जाते हैं, जो रिटेनेड अरनिंग से संबंधित होते हैं। जैसे – Future Need, Economic Help आदि। रिटेंड अर्निंग्स को हिंदी में अधिशेष लाभ या संचित लाभ भी कहा जाता है। यह कंपनी के कुल लाभ का वह हिस्सा होता है जिसे कंपनी अपने पास रखती है, बजाय इसे शेयरधारकों को लाभांश के रूप में बांटने के।

24. Sales Accounts – इस ग्रुप मे माल की बिक्री व बिका माल वापसी से संबंधित लेजर्स क्रीऐट किए जाते हैं। जैसे – Sales A/c, Sales Return A/c आदि।

25. Secured Loans – इस ग्रुप मे सुरक्षित ऋण से संबंधित लेजर्स क्रीऐट किए जाते हैं। ऐसे ऋण, जिनमे ऋण के बदले कोई संपत्ति गिरवी रखी जाती है। जैसे – Bank Loans, Finance Loan आदि।

26. Stock-in-Hand – इस ग्रुप मे स्टॉक से संबन्धित लेजर्स क्रीऐट किए जाते हैं। जैसे- Opening Stock, Closing Stock, Consignment Stock आदि।

27. Sundry Creditors – जब किसी कंपनी या पार्टी से उधार माल (Goods) खरीदते है, तो ऐसी सभी कंपनी या पार्टी के लेजर्स इस ग्रुप के अंतर्गत क्रीऐट किए जाते हैं। जैसे – Mohan’s A/c (Supplier), Ganesha Traders A/c (Supplier) आदि।

28. Sundry Debtors – जब किसी कंपनी या पार्टी को उधार माल (Goods) बेचते है, तो ऐसी सभी कंपनी या पार्टी के लेजर्स इस ग्रुप के अंतर्गत क्रीऐट किए जाते हैं। जैसे – Praveen’s A/c (Customer), Disha Enterprises (Customer) आदि।

29. Suspense Account – इस ग्रुप के अंतर्गत किसी लेन-देन मे हुई भूल-चूक को याद रखने के लिए लेजर्स क्रीऐट किए जाते हैं।

30. Unsecured Loans – जब व्यवसाय मे किसी दोस्त या रिस्तेदार से बिना कोई संपत्ति गिरवी रखे लोन लिया जाता है, तो ऐसे लोन से संबंधित लेजर्स इस ग्रुप मे क्रीऐट किए जाते है। जैसे – Loan from Vijay, Loan from Akash आदि।

नया ग्रुप बनाना | Creating New Group

टैली मे पहले से उपलब्ध ग्रुप के अलावा स्वयं का नया ग्रुप भी क्रीऐट कर सकते है। यहाँ ऑफिस मे होने वाले सभी खर्चों से संबंधित लेजर के लिए Office Expenses नाम से नया ग्रुप बनाना बताया गया है।

Path : Gateway of Tally>Create>Group>Enter

Name : Office Expenses

Under : Indirect Expenses

बाकी सभी ऑप्शन को डिफ़ॉल्ट रहने देंगे तथा Group Creation स्क्रीन Accept कर लेंगे। इस प्रकार हम नया ग्रुप बना सकते हैं।

ग्रुप को अपडेट या डिलीट करना | Group Update/Delete

Path : Gateway of Tally>Alter>Group>Enter

टैली प्राइम मे ग्रुप को अपडेट या डिलीट करने के लिए ऊपर दिए गए पाथ के अनुसार ग्रुप लिस्ट ओपन करें। अब जिस ग्रुप को अपडेट करना है वह सलेक्ट करें, और डिटेल्स को अपडेट करके Accept कर लें। इस तरह ग्रुप अपडेट हो जाएगा। अगर ग्रुप को डिलीट करना है तो Alt + D प्रेस करे तथा कान्फर्मैशन के लिए Yes करें, इस तरह ग्रुप डिलीट हो जाएगा।

नोट : टैली मे स्वयं से बनाए गए ग्रुप को ही डिलीट या अपडेट कर सकते हैं।

अंतिम शब्द

हम आशा करते हैं कि इस ब्लॉग पोस्ट Tally Prime All Groups Explanation के माध्यम से, आपको टैली प्राइम में ग्रुप्स के महत्व और उनके उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी मिली होगी। यदि आपके पास कोई प्रश्न हैं या आप और अधिक जानना चाहते हैं, तो कृपया टिप्पणी करें। इस लेख को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।

धन्यवाद!

नोट – टैली प्राइम से संबंधित सभी पोस्ट इस लिंक Complete Tally Series पर क्लिक करके प्राप्त करें।

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